वर्तमान में प्रदेश में कुल 570 शासकीय महाविद्यालय संचालित है।- मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय
भोपाल , 15 दिसम्बर। campussamachar.com, मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री रहे डॉक्टर मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने मुख्यमंत्री बनने के बाद सामाजिक मुद्दों के साथ-साथ उच्च शिक्षा को भी उत्कृष्ट बनाने का संकल्प ले लिया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में जिस तरह से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और संवर्धन के लिए कॉलेजों को पीएम कॉलेज आफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का संकल्प दोहराया गया है, उससे आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की शिक्षा में व्यापक गुणात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Bhopal education News : डॉ मोहन यादव की मंत्री परिषद किया बैठक 2 दिन पहले आयोजित की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर संचालित अग्रणी/चिन्हित महाविद्यालयों को “पीएम कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस” के रूप में उन्नयन किए जाने के संबंध में निर्णय लिया गया। वर्तमान में प्रदेश में कुल 570 शासकीय महाविद्यालय संचालित है। प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर संचालित अग्रणी/चिन्हित महाविद्यालयों में सभी संकायों में सुविधाओं में वृद्धि करते हुए अग्रणी/चिन्हित महाविद्यालयों को “पीएम कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस “के रूप में उन्नयन किया जाएगा। इस पर अनावर्ती व्यय 312 करोड़ 56 लाख रूपए एवं आवर्ती व्यय 147 करोड़ 84 लाख रूपए इस प्रकार कुल राशि 460 करोड़ 40 लाख रूपए का व्यय अनुमानित है।
छात्रों की डिग्री/अंकसूची को डिजीलॉकर में अपलोड किया जायेगा
उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत संचालित शासकीय/निजी विश्वविद्यालयों में छात्रों की डिग्री/अंकसूची को डिजीलॉकर में अपलोड किये जाने का निर्णय मंत्रिपरिषद द्वारा लिया गया। उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत 16 शासकीय एवं 53 निजी विश्वविद्यालय संचालित है। अभी तक कुल 09 शासकीय विश्वविद्यालयों एवं 5 निजी विश्वविद्यालयों के वर्ष 2019-20 से 2021-22 तक के छात्रों की अधिकांश डिग्री/अंकसूची डिजीलॉकर में दर्ज की जा चुकी है।
साइबर तहसील परियोजना पूरे प्रदेश में लागू होगी
मंत्रि-परिषद द्वारा 1 जनवरी, 2024 से साइबर तहसील की व्यवस्था मध्यप्रदेश के सभी 55 ज़िलों में लागू करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में बिना आवेदन, नामांतरण और अभिलेख दुरुस्तीकरण की फेसलेशव्यवस्था जून, 2022 से लागू की गई है। इसे साइबर तहसील नाम दिया गया है। इसमें रजिस्ट्री उपरांत, क्रेता के पक्ष में अविवादित नामांतरण, एक फ़ेसलेस, पेपरलेस तरीके से ऑनलाइन प्रक्रिया के द्वारा 14 दिन में बिना आवेदन के और बिना तहसील के चक्कर लगाए स्वतः ऑटोमेटिक तरीके से हो जाता है और खसरे तथा नक़्शे में भी क्रेता का नाम चढ़ जाता है। वर्तमान में यह व्यवस्था प्रदेश के 12 जिलों की 442 तहसीलों में लागू है। इसके माध्यम से अब तक 16 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है।
इसके अलावा भी कई अन्य निर्णय लिए गए हैं ।
