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लखनऊ . लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ मनोज पांडेय और महामंत्री प्रोफ़ेसर अंशु केडिया ने लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर जेपी सैनी को आज एक पत्र लिखा है . इसमें कहा गया है कि वे लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा निर्गत संशोधित अधिसूचना पत्र संख्या AD-13111-60 दिनांक 17.07.2026 का संदर्भ ग्रहण करें, जिसके माध्यम से सहयुक्त महाविद्यालयों हेतु लखनऊ विश्वविद्यालय की वित्त समिति द्वारा नई शुल्क संरचना निर्धारित की गयी है। नेताओं ने कुलपति का ध्यान इसी मुद्दे पर कतिपय निम्न मदों पर शुल्क में परिवर्तन पर आपत्ति के साथ अपनी बात कही है .

आइये बिन्दुवार समझें –
1– विश्वविद्यालय द्वारा एल.यू.आर.एन. प्रक्रिया के तहत रू 100/- प्रति छात्र लिया रहा है, एवं 500/- रू नामांकन के नाम पर भी प्रति छात्र लिया जा रहा है l विश्वविद्यालय द्वारा जब पहले से ही एल.यू.आर.एन. शुल्क और नामांकन शुल्क लिया जा रहा है तो प्रति सेमेस्टर रू 250/- रजिस्ट्रेशन शुल्क लेना किसी दृष्टि से उचित नही हैl एक ही विद्यार्थी से तीन तरह के पंजीकरण शुल्क पर संगठन को आपत्ति है l किसी भी छात्र का पंजीकरण विश्वविद्यालय में एक बार होता है तो बार बार पंजीकरण शुल्क क्यो ?
2– शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा के पत्रांक डिग्री विकास 34031/2022-23 दिनांक 14/11/2022 द्वारा महाविद्यालय के लिए प्रति छात्र/ छात्रा रेंजर/रोवर्स की फीस रू 50/- वार्षिक निर्धारित की गयी है, जिसमे विश्वविद्यालय का रू 10/- निर्धारित है, साथ ही साथ जिन महाविद्यालयों मे रोवर्स/ रेजर्स नही है और वे खोलना भी नही चाहते, ऐसे महाविद्यालयों के सभी छात्र/ छात्राओं से इस मद मे रू 50/- शुल्क लिया जाना उचित नही है l
3– वित्तसमिति द्वारा कॉलेज के प्रति अलुमिनाई प्रति सेमेस्टर रू 100/- की मांग करना समझ से परे है, क्योंकि महाविद्यालय की छात्र/छात्राएं महाविद्यालय के एलुमनाई होते हैं तथा विश्वविद्यालय के छात्र/छात्राएं विश्वविद्यालय के एलुमनाई महाविद्यालय के छात्र/ छात्राओं से दोनो जगह के अलुमिनाई का शुल्क लिए जाने पर आपत्ति है l
4– मौखिकी /प्रैक्टिकल के नाम पर भी प्रति छात्र/ छात्रा प्रति सेमेस्टर 100 रुपये शुल्क की माँग की गयी है, आप ( कुलपति )अवगत है कि प्रायोगिक परीक्षा संबंधित महाविद्यालय के शिक्षकों द्वारा करायी जाती हैं, और इसके उपकरण भी उसी संस्था द्वारा क्रय किये जाते हैं और प्रवेश के समय इसका शुल्क भी लिया जाता है, एक ही छात्र से दो बार शुल्क लेना उचित नहीं है,विश्वविद्यालय का कार्य केवल परीक्षा शुल्क लेना है तो अलग से प्रति सेमेस्टर रू 100/- माँग की अपेक्षा समझ से परे है l इसी तरह प्रति स्टूडेंट रू 300/- इंटर्नशिप की माँग भी समझ से परे है, इंटर्नशिप का यदि शुल्क लिया जाए तो यह महाविद्यालय के शिक्षक को दिया जाना चाहिए l साथ ही प्रोसेसिंग शुल्क की माँग भी समझ से परे है l
5– महाविद्यालयों मे शुल्क संरचना शासनादेश द्वारा पहले से निर्धारित होती है जिसमे महाविद्यालय अपने स्तर से बहुत परिवर्तन नही कर सकता l महाविद्यालयों मे बिजली, पानी, इंटरनेट, स्टेशनरी, लाइब्रेरी, शौचालय, खेलकूद, फर्नीचर, टैक्स जैसी अनेकों रूटीन खर्चों के लिए ही धनराशि कम पड़ती है एवम विश्व विद्यालय द्वारा किसी भी प्रकार का सहयोग नही मिलता है l
6– मार्कशीट निर्गत करने हेतु शुल्क 100/- लिया जाना किसी भी दृष्टि से उचित नही है, जब परीक्षा शुल्क लिया जा रहा है तो मार्कशीट शुल्क क्यो, ऐसा प्रतीत होता है कि लखनऊ विश्वविद्यालय पहली बार मार्क शीट दिया जा रहा है।
7– खेल कूद के मद मे भी 50/- प्रति छात्र विश्वविद्यालय को दिया जाने पर भी संगठन आपत्ति व्यक्त करता है l खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रम, शारीरिक शिक्षा विषय, वार्षिक खेल उत्सव लगभग सभी महाविद्यालय मनाते हैं l सभी से प्रति सेमेस्टर 50/- प्रति छात्र की मांग भी न्यायोचित नही है l
इसलिए संगठन मन-माने तरीके से शुल्क निर्धारण एवं वृद्धि किये जाने का विरोध करता है। परीक्षा फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि विश्व विद्यालय द्वारा घोषित की जा चुकी है अत: शुल्क वृद्धि पर यथा शीघ्र पुर्नविचार करने का आग्रह करता है यदि अलग अलग मदों पर जो भी अनुचित शुल्क वृद्धि की गयी है उस आदेश को वापस नही लिया गया तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसका समस्त उत्तर दायित्व विश्वविद्यालय प्रशासन का होगा।
