बिलासपुर . शासकीय प्राथमिक शाला हरदी में पोला तिहार ( Pora Tihar 2026 ) का आयोजन किया गया जिसमें पारंपरिक रूप से नान्दीबैला चुकिया एवं पोरा का छात्र-छात्राओं ने पूजा अर्चना किया शिक्षिका दीपिका श्रीवास्तव ने इस अवसर पर बच्चों को बताया कि छत्तीसगढ़ में हम लोग पोला तिहार ( Pora Tihar 2026 ) क्यों मनाते हैं ।
उन्होंने बताया कि किसी भी राज्य की पहचान उसकी अपनी संस्कृति उसके अपने लोक पर्व से होती है हम सभी छत्तीसगढ़ में रहते हैं और छत्तीसगढ़ मुख्य रूप से कृषि आधारित राज्य है । जहां किसान अपने खेत में जुताई के लिए बैलों को हल में फान्द कर खेत की जुताई करते हैं और उस पर धान बीज बोते हैं । भादो मास की अमावस्या तिथि को पोरा तिहार( Pora Tihar 2026 ) मनाया जाता है जो खरीफ फसल का यह द्वितीय चरण होता है अर्थात अब तक निंदाई और बुवाई का कार्य पूर्ण कर लिया जाता है.

ऐसा माना जाता है कि इस दिन ( Pora Tihar 2026 ) अन्न माता गर्भ धारण करती हैं धान की फसल तैयार होना प्रारंभ हो जाती है इस दिन को छत्तीसगढ़ के किसान पोरा तिहार के रूप में पूरे राज्य में मनाते हैं यह दिन कहीं ना कहीं अपनी मिट्टी से जुड़ने और पशुधन के प्रति सम्मान का प्रतीक है बैलों को नहला धुलाकर सजाकर उनकी पूजा की जाती है घरों में प्रतीक चिन्ह ( Pora Tihar 2026 ) के रूप में मिट्टी से बने बैल चुकिया तथा रसोई में प्रयुक्त होने वाले मिट्टी के बर्तनों के खिलौने और पोरा को विधिवत पूजा अर्चना उन पर छत्तीसगढ़ी व्यंजन चीला, अनरसा, ठेठरी ,खुरमी ,भजिया इत्यादि का भोग लगाया जाता है।
पोरा तिहार ( Pora Tihar 2026 ) के छत्तीसगढ़ के पर्यावरण एवं प्रकृति से किस तरह से निकटता है मानव जीवन और पशुधन की आवश्यकता बच्चों को समझाया विद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं ने बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ विद्यालय में पूजा अर्चना ( Pora Tihar 2026 ) की इस अवसर पर शाला के शिक्षक श्रीमती लक्ष्मी कौशिक एवं श्री माघेलाल मरावी ने सभी छात्र-छात्राओं को अपनी ओर से पोरा तिहार ( Pora Tihar 2026 ) की शुभकामनाएं दी ।
