लखनऊ, 30 जून , उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल 29 जून को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर ( Siddharth University, Kapilvastu, Siddharth Nagar ) के दसवें दीक्षांत समारोह में सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में उत्तीर्ण 52,176 विद्यार्थियों को राज्यपाल जी के करकमलों द्वारा उपाधि प्रदान की गई एवं सभी उपाधियों एवं अंकपत्रों को डिजिलॉकर पर अपलोड किया गया। समारोह में 37 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 28 छात्राएं एवं 9 छात्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 25 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई, जिनमें 15 छात्र एवं 10 छात्राएं सम्मिलित हैं।
दीक्षांत समारोह ( Siddharth University, Kapilvastu, Siddharth Nagar ) को संबोधित करते हुए राज्यपाल जी ने सभी स्नातकों, स्वर्ण पदक विजेताओं, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज का यह अवसर विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम, धैर्य और समर्पण का गौरवपूर्ण क्षण है तथा आज प्राप्त होने वाली उपाधि केवल एक प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि ज्ञान, उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण का संकल्प-पत्र है।

राज्यपाल जी ने कहा कि जनपद सिद्धार्थनगर के 300, जनपद महाराजगंज के 200 तथा जनपद संत कबीर नगर के 200 सहित कुल 700 आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी किट प्रदान की गई हैं। उन्होंने इस कार्य के लिए जिला प्रशासन को बधाई देते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों से यह अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक लगभग 60 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं तथा यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
राज्यपाल जी ने कहा कि बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत आज जनपद सिद्धार्थनगर की 200, जनपद महाराजगंज की 200 तथा जनपद संत कबीर नगर की 200, कुल 600 बेटियों का टीकाकरण किया गया, जिनमें संबंधित जनपदों की पुलिस लाइन में कार्यरत पुलिसकर्मियों की 300 बेटियां भी सम्मिलित हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरुआत सबसे पहले जन भवन से की गई थी, जिसका प्रसार प्रदेश के अन्य जनपदों में भी किया गया। अब तक तीन लाख से अधिक बेटियों को सीएसआर एवं जनसहयोग के माध्यम से एचपीवी वैक्सीन लगाई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत पुलिसकर्मियों, कर्मचारियों तथा अन्य वर्गों की बेटियों को भी जोड़ा गया है। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब बेटियों को यह वैक्सीन निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
इस अवसर पर राज्यपाल जी ने जनपद सिद्धार्थनगर के जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की कुल 9,948 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित कराने, जनपद संत कबीर नगर के जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा 1020 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कराने व जनपद महराजगंज के जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा 1428 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कराने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके प्रयासों की सराहना की।
दहेज प्रथा पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल जी ने इस सामाजिक कुरीति के उन्मूलन के लिए सामूहिक जनभागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय शिक्षा एवं विकास के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहा है, किंतु अभी और उत्कृष्ट कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्वछता पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को स्वच्छ, सुंदर एवं विरण अनुकूल परिसर विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास करने बाहिए।
राज्यपाल जी ने बताया कि जन भवन में मियावाकी वन विकसित किया गया है, जिससे हरित क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को अपने-अपने परिसर में मियावाकी वन विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। राज्यपाल जी ने बताया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या में जिला प्रशासन के सहयोग से मात्र नौ माह में एक अत्यंत सुंदर एवं उपयोगी तालाब का निर्माण कराया गया है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को अपने-अपने परिसर में वर्षा जल संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए इसी प्रकार के तालाब विकसित करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल जी ने बताया कि जन भवन में सभी विश्वविद्यालयों से संबद्ध शासकीय एवं सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की समीक्षा बैठकों का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि अब तक 19 दिनों में 38 समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता उन्होंने स्वयं की है। इन बैठकों में सामने आई विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में और अधिक सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
राज्यपाल जी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन को उत्कृष्ट बनाना तथा ज्ञान को मानव कल्याण, सामाजिक उत्थान और राष्ट्रीय विकास के लिए समर्पित करना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि ऐसे विचारों की प्रयोगशाला हैं जहां से समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने वाले समाधान जन्म लेते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं नवाचार की भावना के साथ संसाधनों के संरक्षण और उनके बेहतर उपयोग के लिए नए मॉडल विकसित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत अमृतकाल के स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुका है और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर निरंतर सृजित हो रहे हैं। ऐसे समय में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी प्रतिभा को सेवा से, अपने ज्ञान को विनम्रता से तथा अपनी सफलता को समाज के कल्याण से जोड़ें। जीवन में चाहे जितनी ऊंचाइयां प्राप्त हों, सत्य, करुणा, परिश्रम और नैतिकता को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। यही भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का सार है और यही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य भी है।
राज्यपाल जी ने कहा कि वर्तमान समय तीव्र विकास और तकनीकी नवाचार का युग है, किंतु प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा संरक्षण को प्रत्येक नागरिक के जीवन का अभिन्न अंग बनाने पर बल देते हुए कहा कि यदि आज जल संरक्षण के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई गई तो भविष्य में जल संकट मानव सभ्यता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
राज्यपाल जी ने गुजरात के सूरत नगर के सर्कुलर वाटर इकोनॉमी मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां अपशिष्ट जल को वैज्ञानिक तकनीक से शुद्ध कर उद्योगों में पुनः उपयोग किया जा रहा है। इससे जल संरक्षण के साथ आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से इस मॉडल से प्रेरणा लेकर स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रयास प्रारंभ करने का आह्वान किया।

उन्होंने वेस्ट टू वेल्थ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले बारह वर्षों में देश में कचरे से संपदा बनाने की सोच एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। यह अभियान स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। उन्होंने सभी से इस दिशा में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।
राज्यपाल जी ने कहा कि पिछले बारह वर्षों में भारत ने आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, अवसंरचनात्मक तथा वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं। सेवा, सुशासन, जनकल्याण, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं ने देश के विकास को नई गति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र के साथ जनधन योजना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना तथा आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का कार्य किया गया है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, सिंचाई, जैविक खेती, किसान उत्पादक संगठनों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल एवं डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रयासों से गांवों के विकास को नई गति मिली है। उन्होंने आधुनिक एक्सप्रेस-वे, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डों, वंदे भारत ट्रेनों, गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान तथा राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन जैसी पहलों को देश के बदलते स्वरूप का प्रतीक बताया।
राज्यपाल जी ने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत को विश्व की अग्रणी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित किया है। यूपीआई, स्टार्टअप इंडिया तथा मेक इन इंडिया जैसी पहलों ने उद्यमिता, नवाचार और रोजगार सृजन को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार बताते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करने वाली नीति है।
उन्होंने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता, वैश्विक संकटों में मानवीय सहायता, जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता तथा वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के साथ भारत ने विश्व मंच पर अपनी प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ किया है। कोविड-19 महामारी के दौरान दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान तथा स्वदेशी वैक्सीन निर्माण ने देश की वैज्ञानिक क्षमता और प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया।

राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे संकल्प लें कि ज्ञान का यह दीपक केवल उनके जीवन को ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को भी आलोकित करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थियों की प्रतिभा, चरित्र और समर्पण विकसित भारत-2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय परिसर में नव विकसित क्रच किलकारी तथा छोटे बच्चों के लिए विकसित बाल उपवन कलरव का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय की दीक्षांत स्मारिका एवं वार्षिक प्रतिवेदन का विमोचन भी किया।
राज्यपाल जी ने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों का अनावरण किया तथा दिव्यांगजन सशक्तिकरण हेतु विकसित केबो सॉफ्टवेयर का शुभारंभ किया। समारोह में राज्यपाल जी ने पुलिस अधिकारियों को प्रमाण-पत्र तथा विश्वविद्यालय के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांव के विद्यालयों के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। राज्यपाल जी ने प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। साथ ही, विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांव में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को भी उन्होंने सम्मानित किया।
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