राजधानी के विश्वविद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों का प्रमोशन नहीं हो रहा था।। मामला राज भवन तक भी गया। इसके बावजूद समय से लिफाफे नहीं खुलने की शिकायत बनी रही। थोड़े दिन बाद निजाम बदला , हालात बदले और अब नए मुखिया ने अपने छमाही के कार्यकाल में ही थोक भाव में प्रमोशन का ऐसा कार्य किया कि इतिहास बन गया । समर्थक बताते हैं कि मुखिया ने ऐतिहासिक फैसला लेकर 169 गुरुजनों को प्रमोट कर दिया है। इसलिए उनका स्वागत बनता है ।मुखिया जी का स्वागत इतनी बड़ी मालाओं से किया गया कि उसे उठाने और पहनाने में दर्जन शिक्षक लगे रहे। साथ ही शिक्षकों ने मुखिया को धन्यवाद भी दिया।मुखिया के खास सलाहकार प्रोफेसर साहब इस पूरे इंतेजाम के नायक रहे हैं वे मंच पर पूरा समय उपस्थित रहे। कार्यक्रम भी उनकी देखरेख में हुआ । वैसे हुए भी उन्हें “आंतरिक” कामकाज का चेयरमैन बनाया गया है । कुल मिलाकर जैसे भी हो गुरुजनों के सम्मान का ख्याल मुखिया ने रखा तो वैसा ही सम्मान गुरुजनों ने मुखिया का किया। बस यही कामना करनी चाहिए कि ये सम्मान बना रहना चाहिए।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!एक वह भी मुखिया थीं
लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों के धरना प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए एक से एक नए पुराने नेता तो पहुंच ही रहे हैं , एक पूर्व मुखिया भी पहुंची। समर्थन देते देते एक पूर्व अध्यक्ष भावुक होकर ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जिसे गुरुकुल में उचित नहीं ठहराया जा सकता है उनके शब्दों पर धरना छात्रों ने तालियां बजाकर स्वागत किया लेकिन जब वीडियो वायरल हुआ तो विश्वविद्यालय के किसी भी व्यक्ति ने अच्छा नहीं कहा , वहीं दूसरी ओर एक पूर्व मुखिया भी पहुंची और उन्होंने शालीनता से अपनी बात कही . लोकतांत्रिक और जन सरोकारों के लिए चर्चित इन मुखिया इस उम्र में भी अन्याय के खिलाफ हर वक्त खड़ी रहती हैं . इसी क्रम में वे विश्वविद्यालय पहुंचकर छात्रों का हौसला बढ़ाया परिसर में उनके आने से एक चर्चा उनके कार्यकाल को लेकर भी हुई , कर्मचारियों ने बताया कि जब वे इस विश्वविद्यालय की मुखिया थीं तो उनके दरवाजे सभी के लिए खुले रहते थे। उनसे मिलने के लिए ना तो समय लेना पड़ता था और नहीं किसी को किसी तरह की रोक-टोक थी।पीड़ित व्यक्ति किसी भी समय जाकर उनसे अपनी बात कह सकता था, लेकिन अब माहौल कुछ ऐसा है कि मुखिया के कार्यालय में भी छात्र और शिक्षक मुलाकात नहीं कर पाते हैं। कहीं चैनल बंद होते हैं तो कहीं उन्हें दूसरी कार्यवाई का सामना करना पड़ता है।
अब खुद नेता जी चुनाव लड़ेंगे
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए चुनावी तैयारी जोरों पर चल रही है हाल ही में एक शिक्षक संगठन ने अपने तीन वरिष्ठ पदाधिकारी को चुनाव में मैदान में उतार दिया है . इनमें लखनऊ के भी एक नेताजी हैं . नेताजी ने अपने समर्थकों से हर हाल में चुनाव जीतने का आह्वान किया है. नेताजी पहले एक विद्यालय प्रबंधन की छत्रछाया में रहते थे और फिर उन्होंने धीरे-धीरे नेतागिरी की लेकिन जब मूल संगठन में बड़े नेता बनने का अवसर नहीं मिला तो उन्होंने फिर एक अपना संगठन खड़ा कर दिया और खुद बड़े नेता बन गए. लखनऊ के शिक्षकों के बीच उनकी अपनी एक विशेष कार्य की विशेष पहचान है . शिक्षकों के हित में कार्य करते हैं और उसमें अपना हित भी तलाश लेते हैं. अब चुनाव के समय अपना हित देखने वाले नेता जी के साथ शिक्षक भी इस तरह का व्यवहार करने वाले हैं , यह वही नेताजी हैं जिन्होंने शिक्षकों की एरियर भुगतान में कट मनी पाने के लिए एक महिला क्लर्क को धमका दिया था हालांकि जब बाद में महिला के रसूख का पता चलते ही खुद बैक हो गए और पूरे मामले को रफा दफा कर दिया।
कब्जा प्रकरण में कुछ तो गोला माल है
राजधानी के एक गर्ल्स हाई स्कूल के भवन पर कब्जा हो गया । मकान मालिक ने ऐसी पैरवी की कि भवन खाली करने के आदेश हो गए । चंद पलों में ही विद्यालय में कब्जा हो गया। फर्नीचर, काफी किताब रजिस्टर सभी किनारे हो गए। स्कूल मैनेजमेंट ने भी इस मामले को तब तक दबाये रखा जबतक कब्जा नहीं हो गया। मामला शिक्षक संगठनों तक तब पहुंचा जब कब्जा हो चुका था फिर हाय तौबा मची और धरना प्रदर्शन शुरू हुआ। विधायक जी भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” के नारे को सार्थक करते हुए धरना प्रदर्शन किया । कुल मिलाकर के भवन खाली करने का आदेश वापस कर लिया गया है। और विद्यालय को पुनः काबिज करने के निर्देश दिए गए हैं । हालांकि पुलिस अभी भी पुन: कब्जा कराने में उतनी तक तेजी नहीं दिखा रही है जितनी पहले दिखाई थी। अब विद्यालय भवन पुनः प्रबंधन तंत्र को मिलेगा और छात्राएं बिना बाधा के विद्यालय में पढ़ सकेंगी।
शिक्षक संगठन के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि उन्हें तो इस पूरे मामले में मिलीभगत लग रही है। प्रबंधन, प्रधानाचार्य सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं अन्यथा इतना बड़ा कांड होने के बाद भी विद्यालय प्रबंधन की ओर से एक लिखित शिकायत तक ना तो शिक्षक संगठनों को दी गई और नहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को । यह बात तो भवन खाली करने के संबंधी आदेश को स्थगित करने के लिए जारी एक आदेश में कहा गया है कि जिला विद्यालय निरीक्षक को चैनलों और समाचार माध्यमों से पता चला है । अब शिक्षा विभाग के अधिकारी को इस पूरे मामले में “ऑपरेशन क्लीन” चलाने वाले हैं।
प्रोफेसर साहब का नेक काम
राजधानी के खुनखुन जी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में राज्यसभा सद्स्य प्रोफेसर दिनेश शर्मा जी ने अपनी सांसद निधि से एक सभागार बनाकर छात्राओं को एक बड़ा उपहार दिया है। वह अपनी सांसद निधि का पूरा उपयोग सार्वजनिक रूप से बड़ी ही शुचिता, पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ करते हैं । वे ऐसे संस्थानों को आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं जिसे आने वाली पीढ़ी को सीख सके। नगर निगम से जुड़े स्कूलों में भी उन्होंने कंप्यूटर सहित मूलभूत संसाधनों की उपलब्धता के लिए भारी भरकम धनराशि प्रदान की थी , अब उन्होंने अपनी सांसद निधि से सभागार निर्मित कराया है । लोकार्पण करते समय सभागार प्रोफेसर साहब जी के पिताजी को समर्पित किया है। उनके पिताजी भी राजधानी के प्रख्यात समाजसेवी रहे हैं। पिताश्री का पूरा जीवन समाज के लिए अनुकरणीय रहा है। काश ऐसे ही अन्य नेता भी शिक्षण संस्थानों के प्रति अपना दयालु भाव रखते और निधि से कुछ-कुछ राशि विद्यालयों के विकास और उन्नयन में व्यय करते तो आने वाली पीढ़ी को भी लाभ मिलता।
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