बिलासपुर , 27 मई पुरुषोत्तम मास में गंगा दशहरा के पावन अवसर गिरधर विहार में निर्मल देवांगन एवं श्रीमती पूजा देवांगन के सौजन्य से शुभमविहार मानस मंडली के सतत 206वें सुंदर कांड पाठ के पश्चात माननीय प्रधानमंत्री से अपील की गई कि पराधीनता के चिह्नों से भारत की मुक्ति और स्व का अधिष्ठान उनके एजेंडा में प्रमुख स्थान रखता है. पराधीनता का एक बड़ा चिह्न है हमारा कैलेण्डर.
इसपर विस्तृत जानकारी देते हुए ललित हीरालाल गर्ग ने बताया कि मुस्लिम शासनकाल में भी हमने हिजरी कैलेण्डर को नहीं अपनाया था और अपने भारतीय पञ्चांग पर ही टिके रहे थे, किन्तु अन्ग्रेज़ी शासनकाल में शासकीय कार्यों में हम पर जो ग्रेगोरियन कैलेण्डर थोप दिया गया, स्वाधीनता के पश्चात् भी हमने उसे ही चलाये रखा. स्वतंत्र भारत की पहली सरकार ने इसको बदलने हेतु महान वैज्ञानिक श्री मेघनाद साहा के नेतृत्व में और CSIR के तत्त्वावधान में एक समिति का भी गठन किया था जिसे भारत के लिए राष्ट्रीय कैलेण्डर की अनुशंसा करने का दायित्व दिया गया था.
इस समिति ने पाया था कि देश के विभिन्न भागों में भिन्न भिन्न पञ्चांग प्रचलन में हैं और अन्त में समिति ने शालिवाहन शक सम्वत के अंतर्गत अयन आधारित सौर पञ्चांग की अनुशंसा की थी. सरकार ने इस अनुशंसा को स्वीकार करते हुए 1957 ईस्वी में इसे देश के राष्ट्रीय कैलेण्डर के रूप में मान्यता दी थी . शक सम्वत ग्रेगोरियन सन की ही भांति सौर कैलेण्डर है. इसमें वर्ष का आरम्भ 22 मार्च को होता है. जिस वर्ष ग्रेगोरियन कैलेण्डर में लीप ईयर होता है उस वर्ष शक सम्वत 21 मार्च को प्रारम्भ होता है. शक सम्वत के प्रारम्भ को 1 चैत्र कहते हैं. इसमें मास के दो पक्ष नहीं होते और दिनांक सीधे गिनती से 30 या 31 तक उसी प्रकार चलते हैं जैसे ग्रेगोरियन कैलेण्डर में चलते हैं. यह सामान्यतया ग्रेगोरियन वर्ष से 78 वर्ष पीछे चलता है. सभी राष्ट्रवादी तत्वों का मानना है कि भारत में ग्रेगोरियन कैलेण्डर के स्थान पर शक सम्वत को शासकीय कार्य में प्रयोग में लाना चाहिए. सरकार के निर्देशानुसार सभी शासकीय पत्राचार और प्रकाशन में ग्रेगोरियन दिनांक के साथ ही शक दिनांक भी लिखना अनिवार्य है, किन्तु इस व्यवस्था में क्योंकि प्रमुखता ग्रेगोरियन कैलेण्डर की ही है अतः यह अधिक लोकप्रिय नहीं हो पाया है.
अंत में शुभमविहार मानस मंडली के सभी सदस्यों अखिलानंद पांडेय, ललित अग्रवाल, ए के स्वर्णकार, सुरेंद्र दुबे, प्रमोद अवस्थी, डी पी सक्सेना, अखिलेश द्विवेदी, भूपेंद्र यादव, दीपक यादव,स्तुति देवांगन, कपिल नाथ देवांगन सहित बड़ी सँख्या में उपस्थित मातृशक्तियो ने सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री जी से आग्रह किया कि देखने में यह पदक्षेप छोटा सा लगता है, किन्तु इसका बहुत गहरा प्रभाव होगा और डिकोलोनायिज़ेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा. वैसे भी, आज गंगा दशहरा की पावन तिथि हैं।
