
- विजूका रिटर्न्स में भारतीय देह नहीं आत्मा दिखती है : सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ
- 01 अप्रैल तक कला स्रोत आर्ट गैलरी, अलीगंज, लखनऊ में चलेगी बिजूका रिटर्न्स प्रदर्शनी
लखनऊ. देश विदेश की नामचीन कला वीथिकाओं में अपने चित्रों की प्रदर्शनी कर चुके प्रख्यात चित्रकार एवं कला समीक्षक अवधेश मिश्र के नवीनतम चित्रों की श्रृंखला बिजूका रिटर्न्स प्रदर्शनी का औपचारिक समापन समारोह आज सम्पन्न हुआ, जिसके मुख्य अतिथि प्रख्यात अभिनेता एवं पटकथा लेखक अतुल तिवारी थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति, रीति-रिवाज एवं मांगलिक प्रतीकों के साथ विजूका की सामंजस्यपूर्ण व्याप्ति और चित्रों के कहन की आज के समय में प्रासंगिकता को देखते हुए कहा कि अवधेश का विजूका काली हँड़िया वाला विजूका नहीं है, वह कहीं कोविड में जीवन के प्रति उत्साह बढ़ाता विज़ूका है तो कहीं पेट्रोमैक्स का उजाला भी दे रहा है। कहीं वह कुत्ते की तरह वफादारी निभा रहा है तो कहीं भारतीय राजनीति पर तंज कसता हुआ सोने की गांधी टोपी भी पहना है। समग्रता में देखें तो अवधेश मिश्र ने इस श्रृंखला के बहाने भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया है।

अतुल तिवारी ने कला दीर्घा के बहाने अवधेश मिश्र के कला समीक्षा के क्षेत्र किये गए अवदान की चर्चा की। सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ ने कहा कि इन चित्रों में भारतीय तन नहीं आत्मा दिखती है। आयोजन में प्रोफेसर जय कृष्ण अग्रवाल, प्रख्यात रंगकर्मी सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, डॉ लीना मिश्र, अनुराग डिडवानिया एवं नगर के अनेक कलाकार और शोधार्थी उपस्थित थे।
